Warning: include(/home/ekhaliya/public_html/whtsappjokes/wp-content/plugins/constant-contact-forms/vendor/composer/../webdevstudios/wds-shortcodes/vendor/tgmpa/tgm-plugin-activation/class-tgm-plugin-activation.php): failed to open stream: No such file or directory in /home/ekhaliya/public_html/whtsappjokes/wp-content/plugins/mojo-marketplace-wp-plugin/vendor/composer/ClassLoader.php on line 444

Warning: include(): Failed opening '/home/ekhaliya/public_html/whtsappjokes/wp-content/plugins/constant-contact-forms/vendor/composer/../webdevstudios/wds-shortcodes/vendor/tgmpa/tgm-plugin-activation/class-tgm-plugin-activation.php' for inclusion (include_path='.:/usr/local/php56/pear') in /home/ekhaliya/public_html/whtsappjokes/wp-content/plugins/mojo-marketplace-wp-plugin/vendor/composer/ClassLoader.php on line 444
दिन के सबसे अच्छे विचार हिंदी में !Best Vichar In Hindi - Whatsapp Jokes

दिन के सबसे अच्छे विचार हिंदी में !Best Vichar In Hindi

Currently browsing Aaj Ka Vichar in Hindi You Cant Download Good Hindi Images for Facebook and Whatsapp Profile Status Update Also Share With Friends and Family SmileWorld.in Images
आज का विचार
मैले और गंदे कपड़े से यदि हमें शर्म आती है!
तो गंदे और मैले विचारो से भी हमें शर्माना चाहिए!

) मन ही मनुष्य को स्वर्ग या नरक में बिठा देता है। स्वर्ग या नरक में जाने की कुंजी भगवान ने हमारे हाथ में दे रखी है। – स्वामी शिवानन्द / Swami Shivanand

2) अपनी नम्रता का गर्व करने से अधिक निंदनीय और कुछ नहीं है। – मारकस औरेलियस

“मनुष्य तो दुर्बलताओं की प्रतिमा है जिसमें देवत्व और दानवत्व दोनों का ही समावेश है।”

मनुष्य तो दुर्बलताओं की प्रतिमा है जिसमें देवत्व और दानवत्व दोनों का ही समावेश है।”

4) भगवान ने मनुष्य को अपने ही समान बनाया, पर दुर्भाग्य से इन्सान ने भगवान को अपने जैसा बना डाला। –

मानव का दानव होना उसकी हार है। मानव का महामानव होना उसका चमत्कार है और मनुष्य का मानव होना उसकी जीत है। – डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन / Dr. Sarvepalli Radhakrishnan

तुम ये कभी मत सोचो कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है। ऐसा सोचना तो सबसे बड़ा अधर्म है। अगर कोई पाप है, तो वो यही है; की, ये कहना तुम निर्बल हो या अन्य लोग निर्बल हैं। – स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda

“निरंतर विकास जीवन का एक नियम है। और जो भी व्यक्ति खुद को सही दिखाने के लिए अपनी रूढ़िवादिता को बरकरार रखने की कोशिश करता है वो खुद को एक गलत स्थिति में पंहुचा देता है।”

9) जब तक हम खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक हम भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते। – स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda

10) जो पुत्र पैदा ही न हुआ हो अथवा पैदा होकर मृत हो अथवा मुर्ख हो। इन तीनों में पहले दो ही बेहतर हैं। न की तीसरा, कारण यह है की प्रथम दोनों तो एक बार ही दुःख देते हैं। जबकि तीसरा पद-पद दुःखदायी होता है।

परेशानियाँ सब के साथ हैं, बस कुछ लोग उन्हें छुपाने में माहिर हैं!

कमजोर केवल इच्छा करते हैं !…जबकि महान लोगों में इच्छा शक्ति होती है…

अपनी चाहत की चीज़ों को पाने की कोशिश के साथ साथ, जो चीजें आपके पास हैं उन्ही से खुश रहना सीखें !
सच्ची दोस्ती एक अच्छे स्वास्थ की तरह है, खोने पर ही उसकी महत्वता पता चलती है !