👫दिवाली पूजा मुहूर्त-🤹 दीपावली शुभ मुहूर्त पूजा विधि 2018 ।।।। Deepawali Pooja Vidhi…..

दिवाली पर शुभ समयकाल में पूजा करते हैं तो आपको जरूर पूजा का फल मिलता है. जानिए क्‍या है इस बार लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त…

दीपावली हिंदू धार्मिक बहुत बड़ा त्यौहार है या बहुत ही हर्ष उल्लास का त्यौहार रहता है इस त्योहार पर सभी के घरों में माता लक्ष्मी की पूजन की जाती है।।।।

कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन दीपावली यानी दिवाली का त्योहार मनाया जाता है. इस बार दिवाली 7 नवंबर 2018 को मनाई जाएगी. मान्यता है कि भगवान राम चौदह साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे. अपने प्रभु राम, माता सीता और प्रभु लक्ष्मण के अयोध्या वापसी की खुशी में लोगों ने चारों तरफ दीप जलाकर उनका स्वागत किया था. मान्याताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान कृष्ण ने भी नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था.

👫दिवाली पूजा मुहूर्त-🤹

दीपावली के दिन प्रदोषकाल में माता लक्ष्मी की👉पूजा होती है. मान्यता है कि इस समय लक्ष्मी जी की पूजा करने से मनुष्य को कभी दरिद्रता का सामना नहीं करना पड़ता.

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त- 17:57 से 19:53

प्रदोष काल- 17:27 से 20:06

वृषभ काल- 17:57 से 19:53

अमावस्या तिथि आरंभ- 22:27 (06 नवंबर)

अमावस्या तिथि समाप्त- 21:31 (07 नवंबर)

💥दीपावली पूजन विधि ⭐

दिवाली के दिन कैसे करें पूजा…

दिवाली पूजन में सबसे पहले श्री गणेश जी का ध्यान करें। इसके बाद गणपति को स्नान कराएं और नए वस्त्र और फूल अर्पित करें।

इसके बाद देवी लक्ष्मी का पूजन शुरू करें। मां लक्ष्मी की प्रतिमा को पूजा स्थान पर रखें। मूर्ति में मां लक्ष्मी का आवाहन करें। हाथ जोड़कर उनसे प्रार्थना करें कि वे आपके घर आएं।

अब लक्ष्मी जी को स्नान कराएं। स्नान पहले जल फिर पंचामृत और फिर वापिस जल से स्नान कराएं। उन्हें वस्त्र अर्पित करें। वस्त्रों के बाद आभूषण और माला पहनाएं।

इत्र अर्पित कर कुमकुम का तिलक लगाएं। अब धूप व दीप जलाएं और माता के पैरों में गुलाब के फूल अर्पित करें। इसके बाद बेल पत्थर और उसके पत्ते भी उनके पैरों के पास रखें। 11 या 21 चावल अर्पित कर आरती करें। आरती के बाद परिक्रमा करें। अब उन्हें भोग लगाएं।

– स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन शुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर सभी देवी देवताओं की पूजा करनी चाहिए.

– शाम के समय पूजा घर में लक्ष्मी और गणेश जी की नई मूर्तियों को एक चौकी पर स्वस्तिक बनाकर स्थापित करना चाहिए.

मूर्तियों के सामने एक जल से भरा हुआ कलश रखना चाहिए. इसके बाद मूर्तियों के सामने बैठकर हाथ में जल लेकर शुद्धि मंत्र का उच्चारण करते हुए उसे मूर्ति पर, परिवार के सदस्यों पर और घर में छिड़कना चाहिए.

– अब फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, मेवे, खील, बताशे, चोकी कलश, फूलों की माला आदि सामग्रियों का प्रयोग करते हुए पूरे विधि-विधान से लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करनी चाहिए.

– इनके साथ-साथ देवी सरस्वती, भगवान विष्णु, मां काली और कुबेर की भी विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए. पूजा करते समय 11 छोटे दीप और एक बड़ा दीप जलाना चाहिए.